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मंगलवार, 11 मई 2021
कॅरोना से प्रकृति की महत्ता का बोध
सोमवार, 10 मई 2021
संघर्ष एक प्राकृतिक प्रक्रिया
एकबार तितली का एक शावक ककून (खोल) से बाहर आने के लिए संघर्ष कर रहा था।नन्ही तितली के इस संघर्ष को वहीं पास बैठा व्यक्ति भी देख रहा था।नन्हीं तितली का प्रयास निरंतर जारी था।पास बैठे व्यक्ति से उस नन्ही तितली का यह कष्ट नहीं देखा जा रहा था।उसे नन्ही तितली पर दया आगई और उसने बिना देर लगाए जल्दी से खोल के बाकी बचे हिस्से को काटकर उस नन्ही तितली को उस खोल से बाहर निकाल दिया ।वह नहीं तितली की मदद करने से बहुत खुश भी हो रहा था।बाहर आई तितली के पंख अभी विकसित नहीं हुए थे।उसका शरीर भी सूझा हुआ लग रहा था।
दरअसल तितली को जिस अनिवार्य संघर्ष से जूझने की जरूरत थी,उस संघर्ष से नहीं जूझने के कारण उस तितली के पंख विकसित नहीं हो सके थे।शीघ्र ही उस व्यक्ति को भी समझ में आ गया था कि तितली को खोल से बाहर निकाल कर उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है। तितली का संघर्ष तितली के पंखों के विकास के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है।संघर्ष की इस अनिवार्य प्रक्रिया को पूरी न होने के कारण तितली ताउम्र उड़ नहीं सकी।
विकास के लिए संघर्ष जरूरी है।दुरूह संघर्ष से हमारी शक्तियां विकसित होती है।इसलिए जीवन में बाधा और चुनौतियों के आने का अर्थ है स्वयं पर विश्वास को जगाना।संघर्ष एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है जिससे जूझे बिना अपनी मंजिल, अपना लक्ष्य पाना नामुमकिन है।बिना संघर्ष के किसी भी क्षेत्र में कामयाबी मिलना असंभव है।यह सच है कि संघर्ष हम बहुत कटु अनुभव देता है।
कई बार तो ये संघर्ष हमें इतनी पीड़ा पंहुचाते हैं कि हमें स्वयं का अस्तित्व ही खत्म होते हुए साफ नजर आने लगता है। लेकिन एक समय के बाद हम देखते हैं कि इन संघर्षों से गुजरने पर यह यह हमें बहुत अच्छे से तराशता है, निखरता है और सँवारता भी है।संघर्ष हमें अद्भुत सांचे में गढ़ कर एक नई पहचान देता है।यदि हम इस संघर्ष से पीछा छुड़ाते हैं तो फिर हम कई तरह की नई समस्याओं को अनजाने में आमंत्रित कर देते हैं।तब हम समाधान के बजाय समस्या के गहरे दलदल में फंसते चले जाते हैं।
सफलता की प्रत्येक राह संघर्षों से गुजर कर ही मंजिल तक पंहुचती है।संघर्ष के समय स्वयं को शांत रखना बहुत बड़ी चुनौती होती है।संघर्ष के क्षणों में संयतभाव सफलता को सुनिश्चित कर देता है।कठिनता के दौर में आशा की किरण जगाए रखना अति आवश्यक होता है।आशावान ही संघर्षों में विजेता बनते हैं।
-डॉ कमलाकान्त बहुगुणा
सर्वा आशा मम मित्रं भवन्तु
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